महापौर का जरहाभाटा एवं ओम नगर से करोड़ों का टैक्स वसूली के टार्गेट पर अमल नहीं। आयुक्त त्रिपाठी महापौर यादव को रख रहे हैं भ्रम की स्थिति में। निगम के दागदार अधिकारी एवं आयुक्त त्रिपाठी बनाए हैं वसूली गैंग : तपन गोस्वामी [ एडिटर इन चीफ ]
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बिलासपुर (11फरवरी2022)[ तपन गोस्वामी द्वारा ] नगर निगम आयुक्त अजय त्रिपाठी और उनके साथ निगम के दागदार अधिकारियों का एक गैंग निगम को पूरी तरह कंगाल बना देने की एक गोपनीय योजना पर काम कर रहे हैं। आयुक्त अजय त्रिपाठी एंड कंपनी कि इतनी भी औकात नहीं है कि वह बिजली का बिल पटा सके महापौर रामशरण यादव रायपुर से अपने राजनीतिक प्रभाव से फंड लाकर निगम को देते है परंतु चंद दिनों में ही फंड खत्म हो जाता है। आयुक्त इस फंड का उपयोग अपने कुछ खास ठेकेदारों को भुगतान करने एवं बाकी बचे फंडो का उपयोग निगम के कुछ दागदार एवं जेल यात्री अधिकारियों से मिलकर फर्जी योजनाओं के नाम से करोड़ों की हेराफेरी करने में लगे है। निगम के कुछ दागदार अधिकारी ठेकेदारों के पार्टनर बन कर कोई काम किए बिना है लाखों वसूल कर रहे हैं। कुछ समय पहले निगम के एक अधिकारी पीके पंचायती पर जो क्रिमिनल अटैक हुआ था वह ठेकेदारी में पार्टनरशिप में रकम बंटवारे को लेकर था परंतु पुलिस इन्वेस्टिगेशन में एंगल बदल दिया गया था। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निगम के पास इतने संसाधन होने के बाद भी स्वावलंबी क्यों नहीं हो रहा है? इसका सिर्फ एक ही कारण है वह महापौर रामशरण यादव जो प्लानिंग दे रहे हैं उसका पालन नहीं हो रहा है। महापौर श्री यादव कई वर्ष तक पार्षद रहे उन्हें पता है कि निगम का टैक्स कहां कहां से आएगा। इस कारण उन्होंने जरहाभाटा, ओम नगर एवं एक अन्य जगह के संपत्ति का सर्च करवा कर उनका टैक्स का संकलन करवाया तो अनुमान से अधिक कई करोड़ रुपए टैक्स वसूली होकर निगम के खाते में जमा होगा। परंतु निगम आयुक्त अजय त्रिपाठी को इतना समय कहां है उन्हें तो उनके वसूली गैंग से 20 या 25 लाख रुपए प्रति माह आ जाता है। परंतु अब समय आ गया है कि इन सब की जांच हो और वास्तविकता सामने आए। ( ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नजर न्यूज़ नेटवर्क)

