*काश पुलिस दुष्कर्म के मामले में पूर्व टी आई कलीम खान के जांच रिपोर्ट की तरह झूठे दुष्कर्म के केस में फंसे साधारण व्यक्तियों की जांच कर रियलिटी सामने लाती। सिविल लाइन थाना 12 वर्ष पुरानी झूठ का दस्तावेज चालान के रूप में पेश किया कोर्ट में: तपन गोस्वामी [एडिटर इन चीफ ]*
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बिलासपुर (11 मार्च 2025) [तपन गोस्वामी द्वारा] शहर के एक वरिष्ठ पत्रकार की बेटी को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम से गाजियाबाद (यूपी) के प्रोफेशनल ठगो ने काफी बड़ी रकम ठग ली थी। मामला दबता जा रहा था। परंतु उक्त वरिष्ठ पत्रकार ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल से मिलकर ठगी की पूरी कहानी बताई। तो इस पर पुलिस अधीक्षक श्री अग्रवाल ने एक पुलिस टीम का गठन कर दिल्ली भेजी। उसमें कुछ अनुभवी पुलिस अधिकारी थे जो की मोबाइल कंपनियों के सहयोग से कॉल डिटेल एवं लोकेशन निकालने में पारंगत माने जाते हैं। परंतु उन्हें साइबर एक्सपर्ट नहीं कहा जा सकता। पुलिस की टीम दिल्ली पहुंचकर एक होटल के कमरे में कैंप ऑफिस बना लिया था। बिलासपुर की यह पुलिस टीम कम समय में ही इन ठगो के विषय में परफेक्ट जानकारी हासिल कर उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। और इसके बाद एक के बाद एक ठग पुलिस के जाल में फसते चले आए। इस टीम में कलीम खान भी थे। उससमय वे क्राइम ब्रांच के प्रभार में भी थे। परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टी आई कलीम खान शहर के कुछ लड़कियों की जासूसी भी किया करते थे। पुलिस विभाग में अपनी सेवा देते हुए वे प्राइवेट डिटेक्टिव भी बन गए थे। और अवैध रूप से प्राइवेट केस भी डील किया करते थे। और शहर की कई लड़कियों के नंबर का कॉल डिटेल और लोकेशन का पता लगाकर महिलाओं के सामने हीरो बनने का प्रयास किया करते थे। दिल्ली में जब शहर के वरिष्ठ पत्रकार की बेटी के साथ हुई मेडिकल एडमिशन ठगी के मुख्य आरोपी पकड़ा गया तो उसे हिरासत में लेकर बाकायदा ट्रांजिट वारंट में बिलासपुर लाया गया था तो वहीं से पुलिस की प्रतिष्ठा तार तार हुई। मुख्य ठग की पत्नी जो की काफी खूबसूरत थी। टी आई कलीमखान की नजर उसे पर पड़ गई। और कलीम खान उसे झूठा आश्वासन यह दे रहा था कि आप परेशान मत हो आपका केस हम कमजोर कर देंगे। मुख्य आरोपी की पत्नी अपने गिरफ्तार पति के साथ बिलासपुर आ गई और शहर के एक होटल एक कमरा ले ली। टी आई कलीम खान अपने पुलिस होने का धौष एवं पुलिस के पावर का दुरुपयोग करते हुए प्रतिदिन मुख्य आरोपी की पत्नी से मिलने होटल के रूम में जाने लगे। बाकी पुलिस स्टाफ को यह बताया गया था कि बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मुख्य आरोपी की पत्नी के पास से मिल जाएगी। जानकार व्यक्तियों का कहना है कि कलीम खान उस महिला से सिर्फ मिलने ही नहीं जाया करते थे बल्कि मामला कुछ और ही था। इसके बाद बात निकल कर सामने आई। और महिला ने कलीम खान के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल से लिखित में की। शिकायत का इन्वेस्टिगेशन हुआ परंतु कमरे में एकांत मिलने की बात तो सामने आई परंतु दुष्कर्म की बात की पुष्टि नहीं हो पाई। और प्रकरण की जांच करने वाले कलीम खान को क्लीन चिट दे दिया। परंतु शिकायत पर तो कुछ एक्शन लेने की आवश्यकता थी। इस कारण उसे पदावनत कर दिया गया। परंतु शहर के विद्वान एवं कानून का जानकारो का कहना है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट में कलीम खान निर्दोष पाए गए। परंतु काश पुलिस का इसी तरह का इन्वेस्टिगेशन उन साधारण व्यक्तियों के लिए भी होनी चाहिए जो की महिलाओं एवं युवतियों के झूठी रिपोर्ट पर अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर या तो जेल में है या तो पुलिस के डर से भागे भागे फिर रहे हैं। अभी हम एक प्रकरण की चर्चा करेंगे जो की थाना सिविल लाइन से संबंधित है। इसी थाना क्षेत्र के जरहाभाटा में रहने वाले एक कुख्यात ठग एवं कथित बिल्डर के परिसर पर रहने वाले कुछ व्यक्तियों को एक युवती द्वारा तैयार की गई झूठी शिकायत के आधार पर फंसा दिया था। मामले की जांच करने में पूरे 12 साल लग गए। कुछ दिन पहले ही सिविल लाइन पुलिस द्वारा इसी प्रकरण का चालान कोर्ट में पेश किया गया। जो कि झूठ का एक पुलिंदा है। परंतु किसी ने यह नहीं पूछा कि 12 साल बाद चालान पेश करने का क्या औचित्य है? इस मामले में पूर्व टी आई काफी भाग्यवान की पुलिस के इन हाउस इन्वेस्टिगेशन में वह निरपराध साबित हुआ न तो उन्हें जेल जानी पड़ी और न ही चालान पेश करने की नौबत ही आई ( ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नगर न्यूज़ नेटवर्क)

