बिलासपुर के एक दैनिक समाचार पत्र का अनुभव प्रमाण पत्र जमा किया था शाहिद अली ने। सेंट्रल यूनिवर्सिटी पत्रकारिता विभाग की पूर्व एचओडी गोपा बागची के पति शाहिद अली के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत। शाहिदअली कुशा भाऊ ठाकरे पत्रकारिता विभाग के हैं प्रोफेसर : तपन गोस्वामी [editor-in-chief ]
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बिलासपुर (20 अप्रैल 2023 ) [तपन गोस्वामी द्वारा ] गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की स्थापना हेतु तत्कालीन महामहिम राज्यपाल ने स्वीकृति दी थी। सन 1988 की बात है उस समय स्थानीय रूप से ऐसा कोई भी योग्य उम्मीदवार नहीं था जो कि बिलासपुर के गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में एच ओ डी बन सके। इस विश्व विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के एच ओ डी हेतु राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी हुआ था। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से बहुत से प्रत्याशी आए परंतु बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के 1987 बैच की मास्टर ऑफ जर्नलिज्म गोपा बागची को चयनित किया गया। हालांकि गोपा बागची भी पत्रकारिता के क्षेत्र में अनुभवहीन रही। परंतु विश्वविद्यालय के विद्वान प्रोफेसरों को लगा कि गोपा बागची बिलासपुर में पत्रकारिता के क्षेत्र में कुछ अच्छे विद्यार्थी निकाल सकती हैं। बनारस की रहने वाली 31 वर्षीय गोपा बागची जब बिलासपुर आई थी उस समय वह अकेली थी। शहर के कुछ युवक पत्रकारिता विभाग में एडमिशन लिए थे। और गोपा बागची को परेशान करने लगे थे। इसे पत्रकारिता विभाग में कोनी के रहने वाले शाहिद अली भी थे। स्थानीय होने से शाहिद का विश्वविद्यालय में काफी दबदबा था। शाहिद अली नियमित रूप से रात को शहर के एक दैनिक समाचार पत्र के कार्यालय में बैठा करता था। जिससे शहर के पत्रकारों का भी शाहिद अली को काफी सपोर्ट था। प्रोफेसर गोपा बागची को परेशान करने वाले स्टूडेंटो को सबक सिखाने के लिए शाहिद अली जेम्स बॉन्ड बन कर आ गया। पत्रकारिता विभाग की एच ओ डी गोपा बागची को शाहिद अली का यह स्टाइल पसंद आ गया। और शाहिद अली की ओर आकर्षित होने लगी। पहले प्रेम और फिर विवाह। गोपा बागची से शादी होने के पश्चात शाहिद अली का पत्रकारिता विभाग में एकछत्र राज्य रहा। गोपा बागची शाहिद अली को मनमाने ढंग से नंबर बढ़ाकर मेरिट के स्तर पर पहुंचा दी। बिलासपुर से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र के अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर शाहिद अली को गोपा बागची ने विश्वविद्यालय की बैकडोर एंट्री दिला दी। काफी साल बाद दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी एवं जालसाजी की शिकायत पुलिस में हुई। रायपुर पुलिस ने गोपा बागची के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की थी। और एक दिन रायपुर पुलिस गोपा बागची को गिरफ्तार कर ली। परंतु इन्होंने पहले से ही हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत ले रखी थी। जिसके कारण उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बाद शाहिद अली अपने फर्जी दस्तावेज के सहारे रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता संस्थान में प्रोफेसर के रूप में नौकरी पा ली। वहां के एच ओ डी को कुछ संदेह हुआ तो शाहिद अली के दस्तावेजों की जांच कराई गई जो फर्जी पाई गई। पुलिस के उच्च अधिकारी शाहिद अली प्रकरण की जांच कर रहे है। (ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नजर न्यूज़ नेटवर्क )

