*बिलासपुर में भी वक्फ बोर्ड संशोधन बिल का होगा तगड़ा असर। मिशन हॉस्पिटल के सामने डॉ सुजय मुखर्जी सहित कई रसूखदारों ने वक्फ बोर्ड की जमीन का किया फर्जी बाड़ा। वक्फ बोर्ड की फर्जी इकरारनामा और बिना निगम के अनुमति के बन गए करोड़ों के आशियाना : तपन गोस्वामी [एडिटर इन चीफ ]*
1 min read
ं बिलासपुर (05 अप्रैल 2025) [तपन गोस्वामी द्वारा ] बहु प्रतीक्षित ऐतिहासिक वक्फ बिल लोकसभा एवं राज्यसभा में भारी बहुमत से पास होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद वक्फ संशोधन बिल कानून का रूप ले लेगा। पूरे देश में इस बिल को लेकर काफी बहस छिड़ गया है। परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रगतिशील एवं शिक्षित मुसलमान इस बिल का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में त्योहार जैसा माहौल है। परंतु पूरे देश में इन सब की धुक धुकी शुरू हो गई है जो की काफी समय से सरकारी जमीनों पर वक्फ बोर्ड का लेवल लगाकर इन पर आलीशान मकान एवं दुकानें बना कर रह रहे हैं। केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक बिल के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वक्फ बोर्ड के नाम से जो फर्जी वाड़ा इतने सालों तक किया उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूरे देश के साथ साथ हम अपने बिलासपुर की बात ले तो तथाकथित वक्फ बोर्ड के पदाधिकारीयो का कहना है कि बिलासपुर का सदर बाजार वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। साथ ही करगी रोड कोटा स्टेशन भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। जरहाभाटा में आधे से अधिक जमीन एवं उसे पर बना निर्माण भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। इनका मानना है कि बिलासपुर पुलिस लाइन पर बना मजार एवं सरकंडा का मुक्ति धाम, जूनी लाइन का अकबर चाल भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। वक्फ बोर्ड के तथाकथित सदस्यों का कहना है कि बिलासपुर तो छोड़ो पूरा हिंदुस्तान वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। जब हमने इस बात का आधार मांगा तो इनका कहना है कि इनके पूर्वज यहां आकर एम बसे इस कारण यहां की संपत्ति वक्फ बोर्ड की है। इस बिल को
लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है और इसके मद्दे नजर हमारी न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन टीम भी सक्रिय हुई तो उन्हें वक्फ बोर्ड के नाम से शहर के कई रसूखदारों द्वारा किए गए करोड़ों के फर्जी बाड़े की हिस्ट्री एवं जियोग्राफी सामने आई। आपको याद होगा उस समय राज्य का विभाजन नहीं हुआ था। भोपाल से ही राज काज चल रहा था। और नंद कुमार पटेल राज्य के गृहमंत्री थे। बिलासपुर के तथा कथित वक्फ बोर्ड की जमीन के कब्जे को लेकर फायरिंग भी हुई थी। जमीन का मामला बृहस्पति बाजार का था। अब हमारी न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन टीम ने मिशन हॉस्पिटल के सामने स्थित कथित वक्फ बोर्ड की जमीन पर शहर के कई रसूखदारों द्वारा फर्जी दस्तावेज बनाकर निगम के अनुमति के बिना कई करोड़ के बंगले बना लेने के सबूत एकत्र किए। कुछ रसूखदारों के पास निगम की अनुमति पत्र है परंतु वह भी फर्जी। जिला चिकित्सालय में पदस्थ रहे नेत्र चिकित्सक डॉ सुजय मुखर्जी का भव्य बंगला भी यही है। यह सारा खेल तत्कालीन वक्फ बोर्ड के पावरफुल किरदारों ने करोड़ों रुपए खाकर सरकारी जमीनों को औने पौने दामों में डॉ सुजय मुखर्जी जैसे शहर के कई रसूखदारों को बेच दिया। अब उनकी नींद हराम हो गई क्योंकि इन्हें मालूम है कि यह कानून बनते ही राज्य सरकार एक्शन लेने में टाइम नहीं लगाएगी। (ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नजर न्यूज़ नेटवर्क)

