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मोपका खसरा न 992/11 एवं 992/12 में महा घोटाला तहसील में करोड़ों की डीलिंग। कलेक्टर के आदेश के बिना उक्त सरकारी जमीन राजकुमार एवं सरोज के नाम पे चढ़ाया गया। उक्त जमीन के प्रकरण को तत्कालीन तहसीलदार एन पी गवेल ने खारिज कर दिया था : तपन गोस्वामी [editor-in-chief ]

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बिलासपुर (24 मई 2023) [तपन गोस्वामी द्वारा ] बिलासपुर तहसील कोर्ट अति तहसीलदार, कोर्ट तहसीलदार तारीख पर तारीख प्रतिदिन चक्कर, सुनवाई कैंसिल, फिर बुझे मन से घर वापसी। और एक दिन मृत्यु। यह हाल है गरीब एवं सामान्य जन का साधारण नामांतरण, सीमांकन, जमीन का नकल प्राप्त करने के लिए साधारण जनता दिन भर जूझती रहती है। परंतु गरीबों एवं सामान्य जनों कि कोई सुनवाई नहीं। और ठीक इसके विपरीत शहर के रसूखदारो का चाहे कितना भी कॉम्प्लिकेटेड काम हो, सरकारी जमीनों के फर्जी दस्तावेज बनाकर उनके नाम करना बिलासपुर तहसील के अधिकारियों का बाएं हाथ का खेल है। एक प्रकरण मोपका के पटवारी हल्का 29 खसरा नंबर 993/1ढ का है इस जमीन के मालिक इनकी जमीन के कागजातों को दुरुस्त कराने के लिए शासन प्रशासन से न्याय मांगा था परंतु कुछ भू माफिया द्वारा इस जमीन के मालिक पर प्राणघातक हमला कर दिया था। परंतु वहीं दूसरी ओर बिलासपुर तहसील में बैठे अधिकारी शहर के राशुखदारो के प्रति इतने मेहरबान है कि वह भूल जाते हैं कि राजस्व का रिकॉर्ड जिंदगी भर सुरक्षित रहता है। जब भोंदू दास वाले प्रकरण में कई सालों बाद एफ आई आर हो सकती है। और पटवारी एवं राजस्व अमले की गिरफ्तारी हो सकती है तो तहसील कार्यालय में अभी जो फर्जीवाड़े एवं गड़बड़ियां हो रही है क्या इसके लिए यह अधिकारी जिम्मेदार हो सकते हैं? भविष्य में कभी मामला खुलने पर क्या यह अधिकारी जेल जा सकते हैं ? अब हम आपको बता दें कि मोपका में शहर के एक रसूखदार कई करोड़ रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। जिसका खसरा नंबर 992/11 क्षेत्रफल 0.8090 हेक्टेयर एवं दूसरी जमीन का खसरा नंबर 992/12 क्षेत्रफल 0.4050 हेक्टेयर है। यह सरकारी बेशकीमती जमीन कई करोड़ रुपए की है। जिस पर शहर के रसूखदार राजकुमार एवं सरोज का अवैधानिक रूप से कब्जा है। इस बेशकीमती सरकारी जमीन का फर्जी एवं कूट रचित दस्तावेज बनाकर अपने नाम पर चढ़ा लिया गया है। इसका राजस्व प्रकरण क्रमांक 400200 एवं दूसरे का 400201 है। पूर्व में यह जमीन अहस्तांतरणीय था परंतु अब तहसील कार्यालय के अधिकारी बिना कलेक्टर के आदेश के यह सरकारी बेशकीमती जमीन को हस्तांतरणीय कर दिया गया है। जानकारी आ रही है कि इस सरकारी जमीन का इस तरह से राजकुमार एवं सरोज के नाम से चढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए कि डीलिंग हुई है। अब वह दिन दूर नहीं है जब जमीन पर गरीब एवं साधारण आदमी नहीं बस पायेंगे बल्कि पूरे जमीनों पर रसूखदारो का कब्जा होगा। तत्कालीन तहसीलदार एन पी गवेल ने मोपका के इस जमीन के प्रकरण को खारिज कर दिया था। परंतु अभी तहसील के अधिकारियों द्वारा यह फर्जीवाड़ा किया गया है। (ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नजर न्यूज़ नेटवर्क )

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