*वीर शहीद विनोद चौबे की बड़ी भाभी श्रीमती विजय लक्ष्मी चौबे ने वार्ड क्रमांक 32 के भाजपा प्रत्याशी अमित तिवारी के चुनावी कार्यालय का किया उद्घाटन। अमित की ईमानदारी, मेहनत एवं वार्ड वासियों के प्रति लगन दिलाएगी उन्हें जीत : तपन गोस्वामी [एडिटर इन चीफ ]*
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बिलासपुर (02 फरवरी 2025) [तपन गोस्वामी द्वारा] नगर निगम चुनाव का पारा बढ़ता चला जा रहा है। अब चुनावी चर्चे चाय के टपरी एवं पान दुकानों में होने लगी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि युवा वर्ग जो की चुनाव से दूर रहते हैं परंतु इस बार बिलासपुर शहर के युवा वर्ग खुलकर अपने शहर की सरकार बनाने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। शहर के चारों तरफ चुनावी माहौल दिख रहा है। पूर्व में भी मसनगंज चुनाव का केंद्र बिंदु रहा है। एक समय था जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एक था। और मसनगंज से निकलने वाली सांध्य दैनिक पत्रिका बिलासपुर टाइम्स की लोकप्रियता भोपाल में बैठे तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने भी मानी थी। एक तरह से कहा जाए की तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का दौरा जब भी बिलासपुर होता था तो वे मासनगंज से निकलने वाली सांध्य दैनिक बिलासपुर टाइम्स जाकर समाचार पत्र के प्रमुख संपादक डीपी चौबे से मिलना नहीं भूलते थे। और वहीं से पूरी राजनीति की दिशा तय होती थी। यह एक दुखद संयोग ही था कि स्व डीपी चौबे के सुपुत्र विनोद चौबे जो की छत्तीसगढ़ पुलिस में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थित थे। एक नक्सली मूवमेंट में वे शहीद हो गए। वार्ड क्रमांक 32 अब शहीद विनोद चौबे नगर के नाम से जाना जाता है। और यहां से चुनाव लड़ रहे भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अमित तिवारी के लिए यह संयोग की बात है कि उनके चुनावी कार्यालय का उद्घाटन वीर शहीद विनोद चौबे की बड़ी भाभी श्रीमती विजय लक्ष्मी के कर कमलों से हुआ। इस अवसर पर वार्ड क्रमांक 32 के नागरिक भी रहे। श्रीमती चौबे ने अमित तिवारी के जीत का आशीर्वाद दिया। वैसे अमित तिवारी के विषय में एक बात यह है कि चुनाव रहे या ना रहे वह हमेशा से ही अपने वार्ड वासियों के प्रति समर्पित रहते हैं। न दिन न रात 24 घंटे जनता के प्रति एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में उभर कर सामने आए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमित तिवारी की लोक प्रियता का पैमाना सिर्फ हिंदू वर्ग ही नहीं बल्कि वहां बसे मुस्लिम, सिख, ईसाई मैं भी काफी है। चुनावी संघर्ष चाहे कैसा भी हो परंतु वार्ड क्रमांक 32 शहीद विनोद चौबे के वार्ड वासी कि सिर्फ एक ही कल्पना है कि वहां से अमित तिवारी ही जीते। (ब्यूरो रिपोर्ट जासूसी नजर न्यूज़ नेटवर्क)

